Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 26
पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 26
बेलि : 1 : 26
सरवर मीत जो हारि , हो रमैया राम
शब्द अर्थ :
सरवर = संसार , विश्व , शृष्टी ! मीत = प्रिती , प्रेम, मैत्री भावना , करूणा ! जो हारि = ज़िसका पराजय हुवा ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों इस संसार मे सुख और आनन्द से रहना चाहते हो तो दुसरे के प्रती मैत्री , करूणा , प्रेम सदभावना होना जरूरी है ! जैसा बर्ताव आप दुसरे के साथ करोगे वैसा ही उसका फल होगा , मैत्री , अहिंसा , धर्म करोगे तो उत्तम फल मिलेगा ! मोह माया अहंकार तृष्णा हत्या अधर्म पाप करोगे तो अच्छा फल कहांसे आयेगा ! जैसा बोवोगे वैसा फल पावोगे !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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