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Showing posts from December, 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 26

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पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 26 बेलि  : 1 :  26 सरवर  मीत जो  हारि , हो  रमैया  राम   शब्द  अर्थ  :  सरवर  = संसार  , विश्व  , शृष्टी  ! मीत  = प्रिती  , प्रेम, मैत्री भावना  , करूणा  ! जो  हारि  = ज़िसका  पराजय  हुवा  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु संतो  !  प्रग्या बोध :  परमात्मा  कबीर बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  इस  संसार  मे  सुख  और  आनन्द  से  रहना चाहते   हो  तो दुसरे  के  प्रती   मैत्री  , करूणा , प्रेम सदभावना  होना  जरूरी  है  ! जैसा  बर्ताव  आप  दुसरे  के  साथ  करोगे  वैसा  ही  उसका  फल  होगा  , मैत्री  , अहिंसा , धर्म  करोगे  तो  उत्तम  फल  मिलेगा  ! मोह  माया...

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 25

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पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 25 बेलि  : 1 :  25 शिर  धुनि  हंसा  उड़ि  चले , हो रमैया राम  !  शब्द  अर्थ  :  शिर  = मानव  शरीर अंग  सर ! धुनि  = अग्नी  !  हंसा  = प्रग्या  बोध , चेतन राम  , चेतना , आत्मा  ! उड़ि  चले  = छोड  दिया  ! हो  रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो !  प्रग्या बोध :  परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों ये  शरीर  चेतन  तत्व  राम  से  बना है  , शृष्टी  के  हर  कण  कण  में  चेतन तत्व राम  ही  है  ,सब  में  राम  और  हम  सब  राम  में  है  पर  तत्व  से  मिलना  यानी  जुडना  और  तत्व  से  अलग  होना  यानी  टूटना  यह  प्रक्रिया  निरंतर  शुरू...

Buraman ! A poem by Jansenani

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#बुरामन !  बुरामन तेरा नाम क्या है  हमारे देश मे तेरा काम क्या है   तू तो जातीवादी तू वर्णवादी  तू बता तेरी पहचान क्या है    बुरामन तेरा नाम क्या है ?  काहँसे तू आया साथ क्या लाया  तुने वेद भेद मनुस्मृती बनाया  ऊचनीच बताता है तू  बता शैतान तेरा इरादा क्या है  बुरामन तेरा नाम क्या है ? तू वसाहतवादी पुंजीवादी मनुवादी  तू तो जन्म जन्मांतर का पाजी  अस्पृष्यता छुवाछुत काम काजी  तू जंगली सुवर मनुष्य मे स्थान क्या है  बुरामन तेरा नाम क्या है ?  #जनसेनानी